इस शरीर का होना हमें माया की वजह से ही दिख रहा है शरीर का अपना अस्तित्व नहीं होता हमारा शरीर पंच तत्व के मेल से बना है। आग, हवा, पानी, मिट्टी और आकाश। इन सभी में से थोड़ा थोड़ा अंश लेकर हमारे शरीर का निर्माण हुआ है। प्रत्येक शरीर में आत्मा का निवास है, हमारा अहंकार और अभिमान ही हमें ईश्वर से दूर किए रहता है, जिससे माया कहते हैं। इसी माया के कारण जीव अपने को ईश्वर से अलग महसूस करता है। जबकि वास्तविक रुप में वह अलग होता नहीं। इस ब्रह्म रूपी नदी में हमें तो बहते चले जाना है। हम एक-एक क्षण के लिए बुलबुला बन जाते हैं फिर जिस प्रकार बुलबुला फट कर नदी में ही विलीन हो जाता है उसी प्रकार हम भी वापस सृष्टि में विलीन हो जाते हैं। यदि हम किसी बहती नदी में एक कमंडल पानी निकालते हैं और कमंडल के जल को यह भी अभिमान हो जाए कि अब उसका अलग अस्तित्व हो गया है तो यह उसकी मूर्खता कही जाएगी। इसलिए ब्रह्म, जीव और माया, इन तीनों को ऐसा भ्रम पैदा करने का मौका न दे और केवल इसी तथ्य पर विचार करें की संपूर्ण संसार में ब्रह्म ही सत्य है। इसके सिवा कोई दूसरा संसार में नहीं है।
संत कबीर दास ने कहा है कि माया महाठग है। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे साधारण से लेकर विशिष्ट व्यक्ति तक बच नहीं सकते हैं। कुछ ऐसे भी, ज्ञानी जन हैं, जिन्हें अपने ज्ञान पर गर्व न होकर घमंड है। याद रखें घमंड कोई भी व्यक्ति करें वह उसके व्यक्तित्व को पतन की ओर ले जाता है। जिसने भी घमंड किया उसने अपने हाथों अपना नाश किया। घमंड भी माया का एक नकारात्मक प्रकार है। माया की लपेट में न आने के लिए व्यक्ति को नकारात्मक गुणों के बजाए सकारात्मक गुणों को स्थान देना होगा। यह मेरा घर और यह उसका घर, यही तो माया हुई। यही माया हमें ब्रह्म तक पहुंचने, उन्हें पहुंचाने और उन्हें पाने में रूकावट बनी हुई है। जब तक हम अपनी धारणा नहीं बदलेंगे, तब तक अहम ब्रह्म का बोध नहीं हो पाएगा और जब अहम ब्रह्म का बोध हो जाएगा, उस दिन सारी माया मिट जायेगी और हम संसार के बंधनों से स्वत: ही मुक्त हो जाएंगे।
Tuesday, March 15, 2016
माया का जाल
Wednesday, May 27, 2015
Don't Be Fear About Problem
स्वामी रामकृष्ण परमहंस के शरीर-त्याग के बाद उनके शिष्य स्वामी विवेकानंद तीर्थयात्रा के लिए निकले| कई के दर्शन करते हुए वह काशी आए और विश्वनाथ के मंदिर में पहुंचे| अच्छी तरह से दर्शन करके बाहर आए तो देखते हैं कि कुछ बंदर इधर-से-उधर चक्कर लगा रहे हैं| स्वामीजी जैसे ही आगे बढ़े कि बंदर उनके पीछे पड़ गए| उन दिनों स्वामीजी लंबा अंगरखा पहना करते थे और सिर पर साफा बांधते थे| विद्या प्रेमी होने के कारण उनकी जेबें पुस्तकों तथा कागजों से भरी रहती थीं| बंदरों को भ्रम हुआ कि उनके जेबों में खाने की चीजें हैं|
अपने पीछे बंदरों को आते देखकर स्वामीजी डर गए और तेज चलने लगे| बंदर भी तेजी से पीछा करने लगे| स्वामीजी ने दौड़ना आरंभ किया| बंदर भी दौड़ने लगे| स्वामीजी अब क्या करें? बंदर उन्हें छोड़ने को तैयार ही नहीं थे| स्वामीजी का बदन थर-थर कांपने लगा| वे पसीने से नहा गए| लोग तमाशा देख रहे थे, पर कोई भी उनकी सहायता नहीं कर रहा था| तभी एक ओर से बड़े जोर की आवाज आई - "भागो मत!" ज्योंही ये शब्द स्वामीजी के कानों में पड़े, उन्हें बोध हुआ कि विपत्ति से डरकर जब हम भागते हैं तो वह और तेजी से हमारा पीछा करती है| अगर हिम्मत से उसका सामना करें तो वह मुंह छिपाकर भाग जाती है| फिर क्या था! स्वामीजी निर्भीकता से खड़े हो गए, बंदर भी खड़े हो गए| थोड़ी देर खड़े रहकर वे लौट गए|
उस दिन से स्वामीजी के जीवन में नया मोड़ आ गया| उन्होंने समाज में जहां कहीं बुराई देखी उससे कतराए नहीं, हौसले से उसका मुकाबला किया|
Tuesday, May 26, 2015
Believe in Yourself
There may be days when you get up in the morning and things aren’t the way you had hoped they would be.
That’s when you have to tell yourself that things will get better. There are times when people disappoint you and let you down.
But those are the times when you must remind yourself to trust your own judgments and opinions, to keep your life focused on believing in yourself.
There will be challenges to face and changes to make in your life, and it is up to you to accept them.
Constantly keep yourself headed in the right direction for you. It may not be easy at times, but in those times of struggle you will find a stronger sense of who you are.
So when the days come that are filled with frustration and unexpected responsibilities, remember to believe in yourself and all you want your life to be.
Because the challenges and changes will only help you to find the goals that you know are meant to come true for you.
Keep Believing in Yourself!
Wednesday, May 20, 2015
Importants Of Goal In Life
Why are Goals Important?
On the best Sunny day, the most powerful magnifying glass will not light paper if you keep moving the glass. But if you focus and hold it, the paper will light up. That is the power of concentration.
A man was traveling and stopped at an intersection. He asked an elderly man, "Where does this road take me?" The elderly person asked, "Where do you want to go?" The man replied, "I don't know." The elderly person said, "Then take any road. What difference does it make?"
How true. When we don't know where we are going, any road will take us there.
Suppose you have all the football eleven players, enthusiastically ready to play the game, all charged up, and then someone took the goal post away. What would happen to the game? There is nothing left. How do you keep score? How do you know you have arrived?
Enthusiasms without direction is like wildfire and leads to frustration. Goals give a sense of direction. Would you sit in a train or a plane without knowing where it was going? The obvious answer is no. Then why do people go through life without having any goals?
Tuesday, May 19, 2015
तुलसी
तुलसी से जुड़ी एक कथा बहुत प्रचलित है। श्रीमद देवि भागवत पुराण में इनके अवतरण की दिव्य लीला कथा भी बनाई गई है। एक बार शिव ने अपने तेज को समुद्र में फैंक दिया था। उससे एक महातेजस्वी बालक ने जन्म लिया। यह बालक आगे चलकर जालंधर के नाम से पराक्रमी दैत्य राजा बना। इसकी राजधानी का नाम जालंधर नगरी था। दैत्यराज कालनेमी की कन्या वृंदा का विवाह जालंधर से हुआ। जालंधर महाराक्षस था। अपनी सत्ता के मद में चूर उसने माता लक्ष्मी को पाने की कामना से युद्ध किया, परंतु समुद्र से ही उत्पन्न होने के कारण माता लक्ष्मी ने उसे अपने भाई के रूप में स्वीकार किया। वहां से पराजित होकर वह देवि पार्वती को पाने की लालसा से कैलाश पर्वत पर गया। भगवान देवाधिदेव शिव का ही रूप धर कर माता पार्वती के समीप गया, परंतु मां ने अपने योगबल से उसे तुरंत पहचान लिया तथा वहां से अंतध्यान हो गईं। देवि पार्वती ने क्रुद्ध होकर सारा वृतांत भगवान विष्णु को सुनाया। जालंधर की पत्नी वृंदा अत्यन्त पतिव्रता स्त्री थी। उसी के पतिव्रत धर्म की शक्ति से जालंधर न तो मारा जाता था और न ही पराजित होता था। इसीलिए जालंधर का नाश करने के लिए वृंदा के पतिव्रत धर्म को भंग करना बहुत ज़रूरी था। इसी कारण भगवान विष्णु ऋषि का वेश धारण कर वन में जा पहुंचे, जहां वृंदा अकेली भ्रमण कर रही थीं। भगवान के साथ दो मायावी राक्षस भी थे, जिन्हें देखकर वृंदा भयभीत हो गईं। ऋषि ने वृंदा के सामने पल में दोनों को भस्म कर दिया। उनकी शक्ति देखकर वृंदा ने कैलाश पर्वत पर महादेव के साथ युद्ध कर रहे अपने पति जालंधर के बारे में पूछा।
ऋषि ने अपने माया जाल से दो वानर प्रकट किए। एक वानर के हाथ में जालंधर का सिर था तथा दूसरे के हाथ में धड़। अपने पति की यह दशा देखकर वृंदा मूर्चिछत हो कर गिर पड़ीं। होश में आने पर उन्होंने ऋषि रूपी भगवान से विनती की कि वह उसके पति को जीवित करें।
Zभगवान ने अपनी माया से पुन: जालंधर का सिर धड़ से जोड़ दिया, परंतु स्वयं भी वह उसी शरीर में प्रवेश कर गए। वृंदा को इस छल का ज़रा आभास न हुआ। जालंधर बने भगवान के साथ वृंदा पतिव्रता का व्यवहार करने लगी, जिससे उसका सतीत्व भंग हो गया। ऐसा होते ही वृंदा का पति जालंधर युद्ध में हार गया। इस सारी लीला का जब वंृदा को पता चला, तो उसने क्रुद्ध होकर भगवान विष्णु को शिला होने का श्राप दे दिया तथा स्वयं सति हो गईं। जहां वृंदा भस्म हुईं, वहां तुलसी का पौधा उगा। भगवान विष्णु ने वृंदा से कहा, ‘हे वृंदा। तुम अपने सतीत्व के कारण मुझे लक्ष्मी से भी अधिक प्रिय हो गई हो। अब तुम तुलसी के रूप में सदा मेरे साथ रहोगी। जो मनुष्य भी मेरे शालिग्राम रूप के साथ तुलसी का विवाह करेगा उसे इस लोक और परलोक में विपुल यश प्राप्त होगा।’
जिस घर में तुलसी होती हैं, वहां यम के दूत भी असमय नहीं जा सकते। गंगा व नर्मदा के जल में स्नान तथा तुलसी का पूजन बराबर माना जाता है। चाहे मनुष्य कितना भी पापी क्यों न हो, मृत्यु के समय जिसके प्राण मंजरी रहित तुलसी और गंगा जल मुख में रखकर निकल जाते हैं, वह पापों से मुक्त होकर वैकुंठ धाम को प्राप्त होता है। जो मनुष्य तुलसी व आवलों की छाया में अपने पितरों का श्राद्ध करता है, उसके पितर मोक्ष को प्राप्त हो जाते हैं।
उसी दैत्य जालंधर की यह भूमि जलंधर नाम से विख्यात है। सती वृंदा का मंदिर मोहल्ला कोट किशनचंद में स्थित है। कहते हैं इस स्थान पर एक प्राचीन गुफ़ा थी, जो सीधी हरिद्वार तक जाती थी। सच्चे मन से 40 दिन तक सती वृंदा देवी के मंदिर में पूजा करने से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।
Saturday, May 16, 2015
Patience ( A story in Hindi)
धैर्य ( Patience )
एक बार एक महात्मा ने एक कहानी सुनाई। उनके दो शिष्य थे। उनमें से एक वृद्ध था, उनका बहुत पुराना और पक्का अनुयायी कड़ी साधना करने वाला एक दिन उसने गुरु से पूछा, ‘‘मुझे मोक्ष या बुद्धत्व की प्राप्ति कब होगी ?’’ गुरु बोले, ‘‘अभी तीन जन्म और लगेंगे।’’ यह सुनते ही शिष्य ने कहा, ‘‘मैं बीसवर्षों से कड़ी साधना में लगा हूँ मुझे क्या आप अनाड़ी समझते हैं। बीससाल की साधना के बाद भी तीन जन्म और ! नहीं नहीं !’’ वह इतना क्रोधित और निराश हो गया कि उसने वहीं अपनी माला तोड़ दी, आसन पटक दिया और चला गया। दूसरा अनुयायी एक युवा लड़का था, उसने भी यही प्रश्न किया। गुरु ने उससे कहा, ‘तुम्हें बुद्धत्व प्राप्त करने में इतने जन्म लगेंगे, जितने इस पेड़ के पत्ते हैं।’’ यह सुनते ही वह खुशी से नाचने लगा और बोला, ‘‘वाह, बस इतना ही ! और इस पेड़ के पत्ते तो गिने भी जा सकते हैं। वाह, आखिर तो वह दिन आ ही आएगा।’’ इतनी प्रसन्नता थी उस युवक की, इतना था उसका संतोष धैर्य और स्वीकृति भाव। कहते हैं, वह तभी, वहीं पर बुद्धत्व को उपलब्ध हो गया।
धैर्य ही बुद्धत्व का मूल मंत्र है अनन्त धैर्य और प्रतीक्षा। परन्तु प्रेम में प्रतीक्षा है तो कठिन। अधिकांश व्यक्ति तो जीवन में प्रतीक्षा निराश होकर ही करते हैं, प्रेम से नहीं कर पाते।
प्रतीक्षा भी दो प्रकार की होती है। एक निराश मन से प्रतीक्षा करना और निराश होते ही जाना। दूसरी है प्रेम में प्रतीक्षा, जिसका हर क्षण उत्साह और उल्लास से भरा रहता है। ऐसी प्रतीक्षा अपने में ही एक उत्सव है, क्योंकि मिलन होते ही प्राप्ति का सुख समाप्त हो जाता है। तुमने देखा, जो है उसमें हमें सुख नहीं मिलता, जो नहीं है, उसमें मन सुख ढूंढता है। उसी दिशा में मन भागता है। हाँ तो प्रतीक्षा अपने में ही एक बहुत बढ़िया साधना है हमारे विकास के लिए। प्रतीक्षा प्रेम की क्षमता और हमारा स्वीकृति भाव बढ़ाती है। अपने भीतर की गहराई को मापने का यह एक सुन्दर पैमाना है।
Friday, May 15, 2015
Don't serious Enjoy the life
"सफर का मजा लेना हो तो साथ में सामान कम रखिए
और
जिंदगी का मजा लेना हैं तो दिल में अरमान कम रखिए !!
तज़ुर्बा है मेरा.... मिट्टी की पकड़ मजबुत होती है,
संगमरमर पर तो हमने .....पाँव फिसलते देखे हैं...!
जिंदगी को इतना सिरियस लेने की जरूरत नही यारों,
यहाँ से जिन्दा बचकर कोई नही जायेगा!
जिनके पास सिर्फ सिक्के थे वो मज़े से भीगते रहे बारिश में ....
जिनके जेब में नोट थे वो छत तलाशते रह गए...
Life creator
जिस पल आपकी मृत्यु हो जाती है, उसी पल से आपकी पहचान एक "बॉडी" बन जाती है। अरे"बॉडी" लेकर आइये, "बॉडी" को उठाइये,"बॉडी" को सूलाइये ऐसे शब्दो से आपको पूकारा जाता है, वे लोग भी आपको आपके नाम से नही पुकारते, जिन्हे प्रभावित करने के लिये आपने अपनी पूरी जिंदगी खर्च कर दी।इसीलिए निर्मिती" को नही निर्माता" को प्रभावित करने के लिये जीवन जियो जीवन मे आने वाले हर चूनौती को स्वीकार करे।...... अपनी पसंद की चिजो के लिये खर्चा किजिये।...... इतना हंसिये के पेट दर्द हो जाये।.... आप कितना भी बूरा नाचते हो, फिर भी नाचिये।...... उस खूशी को महसूस किजिये।...... फोटोज् के लिये पागलों वाली पोज् दिजिये।...... बिलकुल छोटे बच्चे बन जायिये। क्योंकि मृत्यु जिंदगी का सबसे बड़ा लॉस नहीं है। लॉस तो वो है के आप जिंदा होकर भी आपके अंदर जिंदगी जीने की आस खत्म हो चूकी है।..... हर पल को खूशी से जीने को ही जिंदगी कहते है। "जिंदगी है छोटी," हर पल में खुश हूं, "काम में खुश हूं," आराम में खुश हू,"आज पनीर नहीं," दाल में ही खुश हूं,"आज गाड़ी नहीं," पैदल ही खुश हूं,"दोस्तों का साथ नहीं," अकेला ही खुश हूं,"आज कोई नाराज है," उसके इस अंदाज से ही खुश हूं,"जिस को देख नहीं सकता," उसकी आवाज से ही खुश हूं,"जिसकोपा नहीं सकता," उसको सोच कर ही खुश हूं,"बीता हुआ कल जा चुका है," उसकी मीठी याद में ही खुश हूं,"आने वाले कल का पता नहीं," इंतजार में ही खुश हूं,"हंसता हुआ बीत रहा है पल," आज में ही खुश हूं,"जिंदगी है छोटी," हर पल में खुश हूं,अगर दिल को छुआ, तो जवाब देना,वरना बिना जवाब के भी खुश हूं..!!
Thursday, May 14, 2015
Haryana ( हरयाणा अजब ग़ज़ब )
Haryana
हरयाणा अजब है !
हरयाणा ग़ज़ब है !!
अच्छा चलिए : आप कैसे पता करेंगें कि आप हरयाणा के किस कोने में हैं ???
1) दो आदमी लड़ रहे हैं,
एक आदमी आता है,
उन्हें देखता है
और
चला जाता है... ये भिवानी है.
2) दो आदमी लड़ रहे हैं,
एक आदमी आता है, उन्हें समझाने की कोशिश करता है, फलस्वरुप दोनों लड़ना छोड़ कर समझाने वाले को मारने लग जाते हैं...
ये 'सोनीपत' है.
3) दो आदमी लड़ रहे हैं,
एक आदमी अपने घर से आवाज़ देता है :
"मेरे घर के आगे मत लड़ो, कहीं और जाओ".... ये झज्झर है.
4) दो आदमी लड़ रहे हैं, पूरी भीड़ देखने के लिये इकट्ठी हो जाये
और
एक आदमी चाय की दुकान लगा दे....
तो ये हिसार है.
5) दो आदमी लड़ रहे हैं, दोनों मोबाइल से कॉल कर
दोस्तों को बुलाते हैं,
थोड़ी देर में 50 आदमी लडने लगते हैं...
ये 'करनाल' है.
6) दो आदमी लड़ रहे हैं,
एक आदमी ढेर सारी बीयर ले आता है,
तीनों एक साथ बीयर पीते हुए एक-दूसरे को गाली देते हैं...!
ये 'यमुनानगर है.
7) दो आदमी लड़ रहे हैं,
दो आदमी और आते हैं,
वो आपस में बहस करने लगते हैं कि कौन सही है कौन गलत, देखते देखते भीड़ जमा हो जाती है,
पूरी भीड़ बहस करती है, लड़ने वाले दोनों खिसक लेते हैं....!
ये "जींद" है.
8) दो आदमी लड़ रहे हैं,
एक आदमी आता है,
गन निकालता है
और
ढिचकांव...
और सब शान्त हो जाता है..! यानि कि
आप "पानीपत" पहुँच गए...
ओर अगर..
दो आदमी लड़ रहे हैं, उन दोनो कि लडाइ मे तिसरा मार कर चला जाए तो फिर यह समझ लीजिए : रोहतक में
आपका स्वागत है !!! 😇😇😇😇
Monday, May 11, 2015
My Village
े
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था,,
एक नाई, एक खाती, एक काला लुहार था....
छोटे छोटे घर थे, हर आदमी बङा दिलदार था,,
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था..।।
.
कितै भी रोटी खा लेतै, हर घर मे भोजऩ तैयार
था,,,
बिटोङे पे घिया तौरी हो जाती,,
जिसके आगे शाही पनीर बेकार था..
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था।।।
.
दो मिऩट की मैगी ना, झटपट दलिया तैयार
था,,,
नीम की निम्बोली और शहतुत सदाबहार था...
अपणा घङवा कस कै बजा लेते, लख्मी पुरा
संगीतकार था,,,
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था।।।
मुल्तानी माटी ते जोहड़ में नहा लेते, साबुन अर
स्विमिंग पूल बेकार था,,,
अर फेर कबड्डी खेल लेते, कुन्सा म्हारे क्रिकेट का
खुमार था,,,
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था।।।
बुढ़या की बात सुन लेते, कुन्सा टेलीविज़न अर
अखबार था,,,
भाई नै भाई देख कै राज़ी था, सबमै घणा प्यार
था,,,
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था।।।
वो प्यार, वो संस्कृति मैं इब कड़े तै ल्याऊं,
या सोच सोच कै मैं घणाए दुखी पाऊं।
जै वोए टैम फेर आज्या, तो घणाए मजा आज्या,,,
मैं अपनी असली जिन्दगी जी पाऊं, अर मैं इस
धरती पै सो सो शीश झुकाऊं।
Sunday, May 10, 2015
धरती पर भगवान हैं सिद्ध करके दिखाता हूँ
आइये आज आपको "धरती पर भगवान हैं
सिद्ध करके दिखाता हूँ" :
. "अमरनाथजी" में शिवलिंग अपने आप
बनता है
.
"माँ ज्वालामुखी" में
हमेशा ज्वाला निकलती है
. "मैहर माता मंदिर" में रात को आल्हा अब
भी आते हैं
. सीमा पर स्थित तनोट माता मंदिर में 3000
बम में से एक
का ना फूटना
. इतने बड़े हादसे के बाद भी "केदारनाथ
मंदिर" का बाल ना बांका होना
. पूरी दुनियां मैं आज भी सिर्फ "रामसेतु के
पत्थर" पानी में तैरते हैं
"रामेश्वरम धाम" में सागर का कभी उफान
न मारना
. "पुरी के मंदिर" के ऊपर से
किसी पक्षी या विमान का न निकलना
. "पुरी मंदिर" की पताका हमेशा हवा के
विपरीत दिशा में उड़ना
. उज्जैन में "भैरोंनाथ" का मदिरा पीना
. गंगा और नर्मदा माँ (नदी) के
पानी का कभी खराब न होना
,श्री राम नाम धन संग्रह बॆंक में संग्रहीत इकतालीस अरब राम नाम मंत्र पूरित ग्रंथों को (कागज होने पर भी) चूहों द्वारा नहीं काटा जान। जबकि अनेक चूहे अंदर घुमते रहते हॆं।
Mother Day Quote In Hindi
कुछ ऐसा काम करो कि आपके माता-पिता अपनी प्रार्थना में कहें । “हे प्रभु, हमें हर जन्म में ऐसी ही संतान देना ।
हजार के नोटों से तो बस अब जरूरत पूरी होती है... मजा तो " माँ " से मांगे एक रूपये के सिक्के में था।
मैं क्या लिखूँ ,, जिसकी कद्र जमाना करे...!! ये सोच आज "माँ" लिख दिया ...!! love You Maa !!!
क्या मंदिर, क्या मस्जिद, क्या गंगा की धार करे.. वो घर ही मंदिर जैसा है जिसमे औलाद माँ बाप का सत्कार करे.
पता नहीं क्या जादू है माँ के पैरों में ।। जितना झुकता हूँ , उतना ही ऊपर जाता हूँ !!
न अपनों से खुलता है, न ही गैरों से खुलता है. ये जन्नत का दरवाज़ा है, माँ के पैरो से खुलता है.!!
भगवान न दिखाई देने वाले माता-पिता है, और माता-पिता दिखाई देने वाले भगवान है !
माँ की दुआओं मे जन्नत है माँ के आँचल मे स्वर्ग है जिसकी ऊँगली पकड़ तू चला तू आज इतना सक्षम हो गया कि तुझे आज वो बोझ लगी" !!
मेरी दुनिया में इतनी जो शौहरत है मेरी माँ की बदौलत है .. ऐ मेरे भगवान और क्या देगा तु मुझे मेरी माँ ही मेरी सबसे बड़ी दौलत है !!!
उनका कंधा खुदा ने ना जाने कितना मज़बूत बनाया है, हमारी ख्वाहिशों को उठाते हुए माँ बाप ने कभी उफ़ तक...करते !!
किसी ने व्रत रखा और किसी ने उपवास रखा, हमने वो पुण्य नहीं कमाये, बस माँ बाप को अपने पास रखा!!
मेरी माँ मेरा ख़याल इस तरह से रखती थीं की मैं हमेशा आनंद में रहती थी !!
मुझे एक ऐसी माँ के साथ बड़े होने का मौका मिला जिसने मुझे खुद में यकीन करना सिखाया !!
Friday, May 8, 2015
Time Quote's
ना मुहब्बत ना दोस्ती के लिए, वक़्त रुकता नहीं किसी के लिए, ....!!
मिली थी जिंदगी किसी के काम आने के लिए, पर वक़्त बीत रहा है कागज के टुकड़े कमाने के लिए।
अगर जिंदगी में बुरा वक़्त ना आये, तो हम अपनों में पराये और परायों में अपने कभी नहीं ढूंढ पाएंगे।
अच्छा वक़्त जरूर आता है, मगर वक़्त पर ही आता है।
वक़्त का पता नहीं चलता है अपनों के साथ, पर अपनों का पता चल जाता है वक़्त के साth
अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो कि व्यर्थ के लिए समय ही न बचे।
Monday, May 4, 2015
Call of God
☎📱CALL OF GOD📱☎
मैं उपरवाला बोल रहा हूँ, जिसने ये पूरी दुनिया बनाई वो उपरवाला.
तंग आ चूका हूँ मैं तुम लोगों से,
घर का ध्यान तुम न रखो और चोरी हो जाये तो, "उपरवाले तूने क्या किया".
गाड़ी तुम तेज़ चलाओ और धक्का लग जाये तो, "उपरवाले........".
पढाई तुम न करो और फेल हो जाओ तो, "उपरवाले.........".
ऐसा लगता है इस दुनिया में होने वाले हर गलत काम का जिम्मेदार मैं हूँ.
आजकल तुम लोगो ने एक नया फैशन बना लिया है, जो काम तुम लोग नहीं कर सकते, उसे करने में मुझे भी असमर्थ बता देते हो!
उपरवाला भी भ्रष्टाचार नहीं मिटा सकता,
उपरवाला भी महंगाई नहीं रोक सकता,
उपरवाला भी बलात्कार नहीं रोक सकता.......
ये सब क्या है?
भ्रष्टाचार किसने बनाया?
मैंने?
किससे रिश्वत लेते देखा है तुमने मुझे?
मैं तो हवा, पानी, धुप, आदि सबके लिए बराबर देता हूँ,
कभी देखा है कि ठण्ड के दिनों में अम्बानी के घर के ऊपर मैं तेज़ धुप दे रहा हूँ, या गर्मी में सिर्फ उसके घर बारिश हो रही है ?
उल्टा तुम मेरे पास आते हो रिश्वत की पेशकश लेकर,
कभी लड्डू,
कभी पड़े,
कभी चादर.
और हा,
आइन्दा से मुझे लड्डू की पेशकश की तो तुम्हारी खैर नहीं,
मेरे नाम पे पूरा डब्बा खरीदते हो,
एक टुकड़ा मुझपर फेंक कर बाकि खुद ही खा जाते हो.
ये महंगाई किसने बनाई?
मैंने?
मैंने सिर्फ ज़मीन बनाई,
उसे "प्लाट" बनाकर बेचा किसने?
मैंने पानी बनाया,
उसे बोतलों में भरकर बेचा किसने?
मैंने जानवर बनाये,
उन्हें मवेशी कहकर बेचा किसने?
मैंने पेड़ बनाये,
उन्हें लकड़ी कहकर बेचा किसने?
मैंने आज तक तुम्हे कोई वस्तु बेचीं?
किसी वस्तु का पैसा लिया?
सब चीज़ों में कसूर मेरा निकालते हो।
अभी भी समय है
सुधर जाओ
वरना
फिर मत कहना
ये प्रलय क्यूँ आई.
..Pls think over it. Dont play with nature...
Vietnam's inspire by Maharana Pratap
वियतनाम विश्व का एक छोटा सा देश है जिसने..... अमेरिका जैसे बड़े बलशाली देश को झुका दिया।
लगभग बीस वर्षों तक
चले युद्ध में अमेरिका पराजित हुआ। अमेरिका पर विजय के बाद वियतनाम के राष्ट्राध्यक्ष से एक पत्रकार ने एक सवाल पूछा.....
जाहिर सी बात है कि सवाल यही होगा कि आप युद्ध कैसे जीते या अमेरिका को कैसे झुका दिया ??
पर उस प्रश्न का दिए गए उत्तर को सुनकर आप हैरान रह जायेंगे और आपका सीना भी गर्व से भर जायेगा।
दिया गया उत्तर पढ़िये।
सभी देशों में सबसे शक्ति शाली देश अमेरिका को हराने के लिए मैंने एक महान व् श्रेष्ठ भारतीय राजा का चरित्र पढ़ा।
और उस जीवनी से मिली प्रेरणा व युद्धनीति का प्रयोग कर हमने सरलता से विजय प्राप्त की।
आगे पत्रकार ने पूछा...
"कौन थे वो महान राजा ?"
मित्रों जब मैंने पढ़ा तब से जैसे मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो गया आपका भी सीना गर्व से भर जायेगा।
वियतनाम के राष्ट्राध्यक्ष ने
खड़े होकर जवाब दिया...
"वो थे भारत के राजस्थान में मेवाड़ के महाराजा महाराणा प्रताप सिंह !!"
महाराणा प्रताप का नाम
लेते समय उनकी आँखों में एक वीरता भरी चमक थी। आगे उन्होंने कहा...
🚩"अगर ऐसे राजा ने हमारे देश में जन्म लिया होता तो हमने सारे विश्व पर राज किया होता।"
कुछ वर्षों के बाद उस राष्ट्राध्यक्ष की मृत्यु हुई तो जानिए उसने अपनी समाधि पर क्या लिखवाया...
"यह महाराणा प्रताप के एक शिष्य की समाधि है !!"
कालांतर में वियतनाम के
विदेशमंत्री भारत के दौरे पर आए थे। पूर्व नियोजित कार्य क्रमानुसार उन्हें पहले लाल किला व बाद में गांधीजी की समाधि दिखलाई गई।
ये सब दिखलाते हुए उन्होंने पूछा " मेवाड़ के महाराजा महाराणा प्रताप की समाधि कहाँ है ?"
तब भारत सरकार के अधिकारी चकित रह गए, और उनहोंने वहाँ उदयपुर
का उल्लेख किया। वियतनाम के विदेशमंत्री उदयपुर गये, वहाँ उनहोंने महाराणा प्रताप की समाधि के दर्शन किये।
समाधी के दर्शन करने के बाद उन्होंने समाधि के पास की मिट्टी उठाई और उसे अपने बैग में भर लिया इस पर पत्रकार ने मिट्टी रखने का कारण पूछा !!
उन विदेशमंत्री महोदय ने कहा "ये मिट्टी शूरवीरों की है।
इस मिट्टी में एक महान् राजा ने जन्म लिया ये मिट्टी मैं अपने देश की मिट्टी में
मिला दूंगा ..."
"ताकि मेरे देश में भी ऐसे ही वीर पैदा हो। मेरा यह राजा केवल भारत का गर्व न होकर सम्पूर्ण विश्व का गर्व होना चाहिए।"
अपेक्षा व्यक्त करता हूँ की यह पोस्ट आप बड़े अभिमान के साथ ज्यादा से ज्यादा मित्रों शेयर करेंगे।
🚩जय हाे "भारत रत्न" महाराणा प्रताप की
नाम - कुँवर
प्रताप जी {श्री महाराणा प्रतापसिंह जी}
जन्म - 9 मई, 1540 ई.
जन्म भूमि - राजस्थान कुम्भलगढ़
पुन्य तिथि - 29 जनवरी, 1597 ई.
पिता - श्री महाराणा उदयसिंह जी
माता - राणी जीवत कँवर जी
राज्य सीमा - मेवाड़
शासन काल - 1568–1597ई.
शा. अवधि - 29 वर्ष
वंश - सुर्यवंश
राजवंश - सिसोदिया
राजघराना - राजपूताना
धार्मिक मान्यता - हिंदू धर्म
युद्ध - हल्दीघाटी का युद्ध
राजधानी - उदयपुर
पूर्वाधिकारी - महाराणा उदयसिंह जी
उत्तराधिकारी - राणा अमर सिंह जी
अन्य जानकारी - श्री महाराणा प्रताप सिंह
जी के पास एक सबसे प्रिय घोड़ा था,
जिसका नाम 'चेतक' था।
"राजपूत शिरोमणि श्री महाराणा प्रतापसिंह जी" उदयपुर, मेवाड़ में सिसोदिया राजवंश के राजा थे।
वह तिथि धन्य है, जब मेवाड़ की शौर्य-भूमि परमेवाड़-मुकुट मणि राणा प्रताप जी का जन्म हुआ। श्री प्रताप जी का नाम इतिहास मेंवीरता और दृढ प्रण के लिये अमर है। श्री महाराणा प्रतापजी की जयंती विक्रमी सम्वत् कॅलण्डर के अनुसार प्रतिवर्ष ज्येष्ठ, शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाती है।