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Saturday, May 16, 2015

Patience ( A story in Hindi)

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              धैर्य ( Patience )

एक बार एक महात्मा ने एक कहानी सुनाई। उनके दो शिष्य थे। उनमें से एक वृद्ध था, उनका बहुत पुराना और पक्का अनुयायी कड़ी साधना करने वाला एक दिन उसने गुरु से पूछा, ‘‘मुझे मोक्ष या बुद्धत्व की प्राप्ति कब होगी ?’’ गुरु बोले, ‘‘अभी तीन जन्म और लगेंगे।’’ यह सुनते ही शिष्य ने कहा, ‘‘मैं बीसवर्षों से कड़ी साधना में लगा हूँ मुझे क्या आप अनाड़ी समझते हैं। बीससाल की साधना के बाद भी तीन जन्म और ! नहीं नहीं !’’ वह इतना क्रोधित और निराश हो गया कि उसने वहीं अपनी माला तोड़ दी, आसन पटक दिया और चला गया। दूसरा अनुयायी एक युवा लड़का था, उसने भी यही प्रश्न किया। गुरु ने उससे कहा, ‘तुम्हें बुद्धत्व प्राप्त करने में इतने जन्म लगेंगे, जितने इस पेड़ के पत्ते हैं।’’ यह सुनते ही वह खुशी से नाचने लगा और बोला, ‘‘वाह, बस इतना ही ! और इस पेड़ के पत्ते तो गिने भी जा सकते हैं। वाह, आखिर तो वह दिन आ ही आएगा।’’ इतनी प्रसन्नता थी उस युवक की, इतना था उसका संतोष धैर्य और स्वीकृति भाव। कहते हैं, वह तभी, वहीं पर बुद्धत्व को उपलब्ध हो गया।

धैर्य ही बुद्धत्व का मूल मंत्र है अनन्त धैर्य और प्रतीक्षा। परन्तु प्रेम में प्रतीक्षा है तो कठिन। अधिकांश व्यक्ति तो जीवन में प्रतीक्षा निराश होकर ही करते हैं, प्रेम से नहीं कर पाते।
प्रतीक्षा भी दो प्रकार की होती है। एक निराश मन से प्रतीक्षा करना और निराश होते ही जाना। दूसरी है प्रेम में प्रतीक्षा, जिसका हर क्षण उत्साह और उल्लास से भरा रहता है। ऐसी प्रतीक्षा अपने में ही एक उत्सव है, क्योंकि मिलन होते ही प्राप्ति का सुख समाप्त हो जाता है। तुमने देखा, जो है उसमें हमें सुख नहीं मिलता, जो नहीं है, उसमें मन सुख ढूंढता है। उसी दिशा में मन भागता है। हाँ तो प्रतीक्षा अपने में ही एक बहुत बढ़िया साधना है हमारे विकास के लिए। प्रतीक्षा प्रेम की क्षमता और हमारा स्वीकृति भाव बढ़ाती है। अपने भीतर की गहराई को मापने का यह एक सुन्दर पैमाना है।

 

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Friday, May 15, 2015

Don't serious Enjoy the life

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"सफर का मजा लेना हो तो साथ में सामान कम रखिए
और
जिंदगी का मजा लेना हैं तो दिल में अरमान कम रखिए !!

तज़ुर्बा है मेरा.... मिट्टी की पकड़ मजबुत होती है,
संगमरमर पर तो हमने .....पाँव फिसलते देखे हैं...!

जिंदगी को इतना सिरियस लेने की जरूरत नही यारों,
यहाँ से जिन्दा बचकर कोई नही जायेगा!

जिनके पास सिर्फ सिक्के थे वो मज़े से भीगते रहे बारिश में ....
जिनके जेब में नोट थे वो छत तलाशते रह गए...

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Life creator

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जिस पल आपकी मृत्यु हो जाती है, उसी पल से आपकी पहचान एक "बॉडी" बन जाती है। अरे"बॉडी" लेकर आइये, "बॉडी" को उठाइये,"बॉडी" को सूलाइये ऐसे शब्दो से आपको पूकारा जाता है, वे लोग भी आपको आपके नाम से नही पुकारते, जिन्हे प्रभावित करने के लिये आपने अपनी पूरी जिंदगी खर्च कर दी।इसीलिए निर्मिती" को नही निर्माता" को प्रभावित करने के लिये जीवन जियो जीवन मे आने वाले हर चूनौती को स्वीकार करे।...... अपनी पसंद की चिजो के लिये खर्चा किजिये।...... इतना हंसिये के पेट दर्द हो जाये।.... आप कितना भी बूरा नाचते हो, फिर भी नाचिये।...... उस खूशी को महसूस किजिये।...... फोटोज् के लिये पागलों वाली पोज् दिजिये।...... बिलकुल छोटे बच्चे बन जायिये। क्योंकि मृत्यु जिंदगी का सबसे बड़ा लॉस नहीं है। लॉस तो वो है के आप जिंदा होकर भी आपके अंदर जिंदगी जीने की आस खत्म हो चूकी है।..... हर पल को खूशी से जीने को ही जिंदगी कहते है। "जिंदगी है छोटी," हर पल में खुश हूं, "काम में खुश हूं," आराम में खुश हू,"आज पनीर नहीं," दाल में ही खुश हूं,"आज गाड़ी नहीं," पैदल ही खुश हूं,"दोस्तों का साथ नहीं," अकेला ही खुश हूं,"आज कोई नाराज है," उसके इस अंदाज से ही खुश हूं,"जिस को देख नहीं सकता," उसकी आवाज से ही खुश हूं,"जिसकोपा नहीं सकता," उसको सोच कर ही खुश हूं,"बीता हुआ कल जा चुका है," उसकी मीठी याद में ही खुश हूं,"आने वाले कल का पता नहीं," इंतजार में ही खुश हूं,"हंसता हुआ बीत रहा है पल," आज में ही खुश हूं,"जिंदगी है छोटी," हर पल में खुश हूं,अगर दिल को छुआ, तो जवाब देना,वरना बिना जवाब के भी खुश हूं..!!

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Thursday, May 14, 2015

Haryana ( हरयाणा अजब ग़ज़ब )

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Haryana
हरयाणा अजब है !
हरयाणा ग़ज़ब है !!
अच्छा चलिए : आप कैसे पता करेंगें कि आप हरयाणा के किस कोने में हैं ???

1) दो आदमी लड़ रहे हैं,
एक आदमी आता है,
उन्हें देखता है
और
चला जाता है... ये भिवानी है.

2) दो आदमी लड़ रहे हैं,
एक आदमी आता है, उन्हें समझाने की कोशिश करता है, फलस्वरुप दोनों लड़ना छोड़ कर समझाने वाले को मारने लग जाते हैं...
ये 'सोनीपत' है.

3) दो आदमी लड़ रहे हैं,
एक आदमी अपने घर से आवाज़ देता है :
"मेरे घर के आगे मत लड़ो, कहीं और जाओ".... ये झज्झर है.

4) दो आदमी लड़ रहे हैं, पूरी भीड़ देखने के लिये इकट्ठी हो जाये
और
एक आदमी चाय की दुकान लगा दे....
तो ये हिसार है.

5) दो आदमी लड़ रहे हैं, दोनों मोबाइल से कॉल कर
दोस्तों को बुलाते हैं,
थोड़ी देर में 50 आदमी लडने लगते हैं...
ये 'करनाल' है.

6) दो आदमी लड़ रहे हैं,
एक आदमी ढेर सारी बीयर ले आता है,
तीनों एक साथ बीयर पीते हुए एक-दूसरे को गाली देते हैं...!
ये 'यमुनानगर है.

7) दो आदमी लड़ रहे हैं,
दो आदमी और आते हैं,
वो आपस में बहस करने लगते हैं कि कौन सही है कौन गलत, देखते देखते भीड़ जमा हो जाती है,
पूरी भीड़ बहस करती है, लड़ने वाले दोनों खिसक लेते हैं....!
ये "जींद" है.

8) दो आदमी लड़ रहे हैं,
एक आदमी आता है,
गन निकालता है
और
ढिचकांव...
और सब शान्त हो जाता है..! यानि कि
आप "पानीपत" पहुँच गए...
ओर अगर..
दो आदमी लड़ रहे हैं, उन दोनो कि लडाइ मे तिसरा मार कर चला जाए तो फिर यह समझ लीजिए : रोहतक में
आपका स्वागत है !!! 😇😇😇😇

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Monday, May 11, 2015

My Village

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े
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था,,
एक नाई, एक खाती, एक काला लुहार था....
छोटे छोटे घर थे, हर आदमी बङा दिलदार था,,
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था..।।
.
कितै भी रोटी खा लेतै, हर घर मे भोजऩ तैयार
था,,,
बिटोङे पे घिया तौरी हो जाती,,
जिसके आगे शाही पनीर बेकार था..
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था।।।
.
दो मिऩट की मैगी ना, झटपट दलिया तैयार
था,,,
नीम की निम्बोली और शहतुत सदाबहार था...
अपणा घङवा कस कै बजा लेते, लख्मी पुरा
संगीतकार था,,,
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था।।।
मुल्तानी माटी ते जोहड़ में नहा लेते, साबुन अर
स्विमिंग पूल बेकार था,,,
अर फेर कबड्डी खेल लेते, कुन्सा म्हारे क्रिकेट का
खुमार था,,,
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था।।।
बुढ़या की बात सुन लेते, कुन्सा टेलीविज़न अर
अखबार था,,,
भाई नै भाई देख कै राज़ी था, सबमै घणा प्यार
था,,,
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था।।।
वो प्यार, वो संस्कृति मैं इब कड़े तै ल्याऊं,
या सोच सोच कै मैं घणाए दुखी पाऊं।
जै वोए टैम फेर आज्या, तो घणाए मजा आज्या,,,
मैं अपनी असली जिन्दगी जी पाऊं, अर मैं इस
धरती पै सो सो शीश झुकाऊं।

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